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अनूप हत्याकांड में अनुसूचित जाति आयोग सख्त, हरिद्वार SSP से 13 नवंबर तक मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट

जोशीमठ: जोशीमठ के चर्चित अनूप कुमार हत्याकांड मामले में अब उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए हरिद्वार पुलिस से जवाब तलब किया है। आयोग ने हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को सम्मन जारी कर अनूप की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में अब तक की गई कार्रवाई और विवेचना की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि संबंधित अभिलेखों और आवश्यक दस्तावेजों के साथ पूरी आख्या 13 नवंबर 2026 तक उपलब्ध कराई जाए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई या रिपोर्ट अधूरी पाई गई, तो एसएसपी को संबंधित साक्ष्यों और अभिलेखों के साथ आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए तलब किया जा सकता है। अनूप की पत्नी पूजा देवी की ओर से आयोग में शिकायत किए जाने के बाद यह कार्रवाई सामने आई है।

पत्नी की शिकायत पर आयोग ने लिया संज्ञान

जानकारी के अनुसार, जोशीमठ निवासी अनुसूचित जाति समुदाय के युवक अनूप कुमार की 16 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। परिजनों ने इसे हत्या बताते हुए न्याय की मांग की है। परिवार की शिकायत के बाद मामला अनुसूचित जाति आयोग तक पहुंचा, जिसके बाद आयोग ने हरिद्वार पुलिस से अब तक की जांच और कार्रवाई का पूरा ब्योरा मांगा है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में मामले की निष्पक्ष विवेचना, अब तक उठाए गए कदमों और उपलब्ध साक्ष्यों से संबंधित जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। अब पुलिस को निर्धारित समय के भीतर आयोग के सामने अपनी कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करना होगा।

FIR दर्ज कराने के लिए परिवार को भटकना पड़ा: परिजनों का आरोप

अनूप की मौत के बाद से ही परिवार पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाता रहा है। परिजनों का आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए शोकाकुल पत्नी और परिवार के सदस्यों को जोशीमठ से हरिद्वार और फिर हरिद्वार से जोशीमठ के चक्कर लगाने पड़े। परिवार का कहना है कि घटना के बाद पुलिस को शिकायत के आधार पर नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू करनी चाहिए थी, लेकिन शुरुआत में टालमटोल की गई। परिजनों के मुताबिक, अंततः हरिद्वार के एसएसपी के हस्तक्षेप के बाद ही जीरो एफआईआर दर्ज हो सकी। मामले में मुख्य आरोपी के आईटीबीपी में कार्यरत होने का भी दावा किया गया है। हालांकि, इस संबंध में सामने आए आरोपों और आरोपी की भूमिका की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही हो सकेगी।

मामले को कमजोर करने की कोशिश का आरोप

जोशीमठ संघर्ष समिति के अतुल सती और अनूप के परिजनों ने पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि घटना से जुड़े विवरण और साक्ष्य उपलब्ध होने के बावजूद मामले को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। परिवार का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी उन्हें जांच की दिशा और प्रगति के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि जिस घटना को वे हत्या बता रहे हैं, उसे पुलिस ने आत्महत्या से संबंधित धाराओं में दर्ज किया है। उनका यह भी कहना है कि शिकायत में अपहरण का उल्लेख किए जाने के बावजूद अपहरण से संबंधित धाराएं प्राथमिकी में शामिल नहीं की गईं। इसके अलावा, परिवार ने मुख्य आरोपी के भाई पर अनूप को जान से मारने की धमकी देने और राजस्थान में हुए एक सड़क हादसे की जिम्मेदारी लेने के लिए दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि इन बिंदुओं को भी प्राथमिकी में शामिल नहीं किया गया। इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच के निष्कर्षों से होनी बाकी है।

जांच हरिद्वार पुलिस करेगी, परिवार ने उठाए सवाल

परिवार और जोशीमठ संघर्ष समिति का कहना है कि घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई कि विवेचना किस दिशा में आगे बढ़ रही है। जब इस संबंध में जोशीमठ थाने से जानकारी मांगी गई, तो कथित तौर पर बताया गया कि घटना हरिद्वार की होने के कारण मामले की जांच हरिद्वार पुलिस करेगी। इस जानकारी के बाद पीड़ित परिवार ने सवाल उठाया है कि क्या हरिद्वार पुलिस स्वयं परिवार को जांच की प्रगति से अवगत कराएगी या फिर उन्हें न्याय की प्रक्रिया के लिए बार-बार हरिद्वार के चक्कर लगाने पड़ेंगे। परिवार का कहना है कि एक ओर वे अपने सदस्य को खोने के दुख से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें पुलिस और प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच भी संघर्ष करना पड़ रहा है।

मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर भी परिवार चिंतित

अनूप के परिजनों ने मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि घटना के बाद से अब तक पुलिस की ओर से गिरफ्तारी और जांच की प्रगति को लेकर कोई स्पष्ट एवं पुख्ता जानकारी उन्हें नहीं मिली है। परिवार लगातार निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है। परिजनों और जोशीमठ संघर्ष समिति का कहना है कि मामले में सभी पहलुओं की जांच होनी चाहिए, जिसमें कथित धमकियों, अपहरण के आरोप और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों को भी शामिल किया जाए।

13 नवंबर तक पुलिस को देनी होगी विस्तृत रिपोर्ट

अनुसूचित जाति आयोग के हस्तक्षेप के बाद अब हरिद्वार पुलिस की कार्रवाई पर नजर रहेगी। आयोग ने एसएसपी से 13 नवंबर 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। तय समयसीमा में रिपोर्ट नहीं देने या अधूरी जानकारी देने की स्थिति में एसएसपी को साक्ष्यों सहित आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए बुलाया जा सकता है। अब पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि आयोग के हस्तक्षेप से मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित होगी और उन्हें जांच की प्रगति की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल यही है कि अनूप की मौत के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और जांच के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कब तक कार्रवाई होती है।

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