उत्तराखंडदेहरादून

प्रीतम सिंह के भाइयों से जुड़े कथित ऑडियो पर सियासी घमासान, मधु चौहान ने उठाए सवाल

उत्तराखंड की सियासत में चकराता विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा एक कथित ऑडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। यह ऑडियो कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह के भाइयों चमन सिंह और राजपाल सिंह से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि ऑडियो में स्थानीय निवासी बालकराम के साथ गाली-गलौज, दबाव बनाने और धमकी देने जैसी बातें सुनाई दे रही हैं। हालांकि, वायरल ऑडियो की प्रामाणिकता और उसमें लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

बेटियों के कॉलेज चुनाव को लेकर विवाद का आरोप

मामले में आरोप लगाया जा रहा है कि बालकराम पर अपनी बेटियों को कांग्रेस के समर्थन में लाने के लिए दबाव बनाया गया। बताया जा रहा है कि विवाद उनकी बेटियों के डिग्री कॉलेज में चुनाव लड़ने को लेकर शुरू हुआ। वायरल ऑडियो को लेकर अब राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं और भाजपा ने कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह को निशाने पर लिया है। हालांकि, पूरे मामले में वायरल ऑडियो की सत्यता, बातचीत के संदर्भ और आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी भी आरोप को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।

मधु चौहान ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की

भाजपा नेत्री मधु चौहान ने मामले को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कांग्रेस के महिला सम्मान और न्याय से जुड़े दावों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी को अपने क्षेत्र में उठ रहे सवालों पर भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की। मधु चौहान ने विधायक प्रीतम सिंह की न्याय यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें पहले अपने विधानसभा क्षेत्र की जनता के साथ न्याय सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने कथित ऑडियो में सुनाई देने वाली अभद्र भाषा और धमकी से जुड़े आरोपों को गंभीर बताया।

भाजपा के आरोपों से बढ़ी राजनीतिक हलचल

मधु चौहान ने दावा किया कि यह कोई पहला मामला नहीं है और लोग डर या दबाव के कारण सामने आने से बचते रहे हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। ऐसे में पूरे प्रकरण में संबंधित पक्षों का जवाब और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल कथित ऑडियो को लेकर उत्तराखंड में राजनीतिक बयानबाजी तेज है। मामले में निष्पक्ष जांच, ऑडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

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