उत्तराखंडपौड़ी गढ़वाल

पौड़ी में गुलदार के हमले से बच्ची की मौत के बाद बवाल, ग्रामीणों ने तहसीलदार-SDO को दुकान में किया बंद; DFO से धक्का-मुक्की

देवप्रयाग-पौड़ी मोटर मार्ग पर खांड्यूसैंण के पास गुलदार के हमले में तीन वर्षीय मासूम बच्ची आरुषि की मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। घटना के विरोध में मंगलवार शाम ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी का घेराव किया था। वहीं, बुधवार को आक्रोशित ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे पौड़ी के तहसीलदार और वन विभाग के एसडीओ को एक दुकान में बंद कर दिया। स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई, जब ग्रामीणों की डीएफओ महातिम यादव के साथ भी धक्का-मुक्की हुई। मासूम की मौत से पूरे क्षेत्र में दहशत और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में वन्यजीवों के हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन लोगों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इसी नाराजगी के चलते ग्रामीण सड़क पर उतर आए और अधिकारियों से जवाब मांगने लगे।

गुलदार ने तीन साल की आरुषि को बनाया निवाला

जानकारी के अनुसार, 3 नवंबर मंगलवार शाम करीब छह बजे खांड्यूसैंण क्षेत्र में गुलदार ने तीन वर्षीय आरुषि पर हमला कर दिया। इस हमले में बच्ची की मौत हो गई। घटना की खबर फैलते ही ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। शाम करीब 7:30 बजे पौड़ी विधायक राजकुमार पोरी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। इस दौरान ग्रामीणों ने विधायक को घेर लिया और उनकी गाड़ी के आसपास जमकर नारेबाजी की। कुछ ग्रामीण विधायक की कार के ऊपर भी चढ़ गए। हालात को देखते हुए विधायक काफी देर तक अपनी गाड़ी के भीतर ही रहे। पुलिसकर्मी लगातार ग्रामीणों को समझाने का प्रयास करते रहे, लेकिन विरोध जारी रहा। रात करीब 10:15 बजे विधायक कार से बाहर आए और ग्रामीणों से बातचीत कर क्षेत्र में सुरक्षा के इंतजाम कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद उनका काफिला वहां से रवाना हो सका।

सड़क जाम कर धरने पर बैठे ग्रामीण, अधिकारियों को दुकान में किया बंद

बुधवार सुबह करीब आठ बजे ग्रामीण पौड़ी-देवप्रयाग मोटर मार्ग पर धरने पर बैठ गए और सड़क जाम कर दी। इसके चलते मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा। सुबह करीब नौ बजे तक सड़क पूरी तरह बंद रही। ग्रामीणों को समझाने के लिए पौड़ी के तहसीलदार राजेंद्र गोस्वामी और वन विभाग की एसडीओ आयशा बिष्ट मौके पर पहुंचे। हालांकि, अधिकारियों को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। बातचीत के दौरान नाराजगी बढ़ती गई और करीब 11:30 बजे ग्रामीणों ने दोनों अधिकारियों को एक दुकान के अंदर बंद कर दिया।

DFO के साथ भी हुई धक्का-मुक्की

तहसीलदार और एसडीओ को दुकान में बंद किए जाने की सूचना मिलने पर पौड़ी के डीएफओ महातिम यादव मौके पर पहुंचे। यहां ग्रामीणों और डीएफओ के बीच तीखी नोकझोंक हुई और धक्का-मुक्की भी हुई। डीएफओ की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद करीब आधे घंटे तक दुकान में बंद रहे तहसीलदार और एसडीओ को ग्रामीणों ने बाहर निकलने दिया। इसके बाद डीएफओ और ग्रामीणों के बीच बातचीत शुरू हुई। ग्रामीणों की प्रमुख मांग क्षेत्र में गुलदार के खतरे से तत्काल सुरक्षा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने की है।

बच्चों को घर से बाहर भेजने में भी डर रहे ग्रामीण

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में वन्यजीवों की आवाजाही और हमलों की घटनाओं के कारण लोगों के बीच भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक, अब लोग अपने घरों के आंगन और आसपास के रास्तों पर भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। अभिभावकों को छोटे बच्चों को घर से बाहर भेजने में भी डर लग रहा है। ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में नियमित गश्त, गुलदार की निगरानी और लोगों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि केवल आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जमीन पर ठोस कार्रवाई जरूरी है।

गुलदार को पकड़ने के लिए गश्त, ट्रैप कैमरा और पिंजरा लगाया

डीएफओ पौड़ी महातिम यादव ने बताया कि मंगलवार रात घटना के बाद ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई थी। क्षेत्र में एक टीम लगातार गश्त कर रही है। गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ट्रैप कैमरे और पिंजरा भी लगाया गया है। उन्होंने बताया कि शूटर की टीम भी मौके पर मौजूद है। गुलदार को ट्रैंकुलाइज करने और अंतिम विकल्प के तौर पर उसे मारने के आदेश प्राप्त होने की जानकारी भी डीएफओ ने दी। फिलहाल वन विभाग और ग्रामीणों के बीच बातचीत जारी है। वहीं, मासूम की मौत के बाद क्षेत्र में तनाव और भय का माहौल बना हुआ है।

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