
देहरादून: उत्तराखंड में मेडिकल शिक्षा का दायरा बढ़ाने और युवाओं को डॉक्टर बनने के अधिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार प्रयास तेज कर रही है। सरकार का लक्ष्य प्रदेश के हर जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करना है, ताकि विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रुख कम करना पड़े। इसी क्रम में रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज से भी उम्मीदें जुड़ी हैं, जहां 100 एमबीबीएस सीटों के लिए अनुमति मिलने की प्रतीक्षा है। चिकित्सा शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश के छह राजकीय मेडिकल कॉलेजों में फिलहाल कुल 675 एमबीबीएस सीटें हैं। रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज की 100 सीटें शुरू होने पर राजकीय मेडिकल कॉलेजों में इनकी संख्या बढ़कर 775 हो जाएगी। वहीं, निजी मेडिकल कॉलेजों और एम्स ऋषिकेश की सीटों को मिलाकर राज्य में मेडिकल शिक्षा के अवसरों का दायरा और व्यापक होगा।
रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में 100 सीटें शुरू होने की उम्मीद
ऊधमसिंह नगर जिले के रुद्रपुर में मेडिकल कॉलेज का निर्माण पूरा होने के बाद अब वहां एमबीबीएस पाठ्यक्रम शुरू करने की दिशा में आगे की प्रक्रिया पर नजर है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कॉलेज में 100 एमबीबीएस सीटों के लिए अनुमति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इन सीटों को मंजूरी मिलने से प्रदेश में सरकारी मेडिकल शिक्षा की क्षमता बढ़ेगी। हालांकि, सीटों की उपलब्धता और प्रवेश प्रक्रिया संबंधित नियामक मंजूरी तथा आधिकारिक घोषणा पर निर्भर करेगी। सरकार की योजना मेडिकल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ प्रदेश में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने की भी है। नए मेडिकल कॉलेज स्थापित होने से विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर पढ़ाई के अवसर मिल सकते हैं और भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में मदद मिल सकती है।
छह राजकीय मेडिकल कॉलेजों में 675 एमबीबीएस सीटें
चिकित्सा शिक्षा विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड के छह राजकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों का ब्योरा इस प्रकार है:
- दून मेडिकल कॉलेज, देहरादून: 150 सीटें
- राजकीय मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर: 150 सीटें
- राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी: 125 सीटें
- राजकीय मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा: 100 सीटें
- राजकीय मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार: 100 सीटें
- राजकीय मेडिकल कॉलेज, पिथौरागढ़: 50 सीटें
इन छह संस्थानों में कुल 675 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं। रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज की प्रस्तावित 100 सीटें शुरू होने पर सरकारी मेडिकल कॉलेजों की कुल क्षमता 775 सीटों तक पहुंच सकती है।
निजी मेडिकल कॉलेजों में 900 सीटें, एम्स ऋषिकेश में 125
उत्तराखंड में सरकारी संस्थानों के अलावा निजी मेडिकल कॉलेज और केंद्रीय संस्थान भी चिकित्सा शिक्षा में योगदान दे रहे हैं। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, चार निजी मेडिकल कॉलेजों में कुल 900 एमबीबीएस सीटें हैं। इनमें हिमालयन इंस्टीट्यूट, जौलीग्रांट में 250 सीटें, एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज, देहरादून में 250 सीटें, गौतम बुद्ध मेडिकल कॉलेज, देहरादून में 150 सीटें और ग्राफिक एरा इंस्टीट्यूट, देहरादून में 250 सीटें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, एम्स ऋषिकेश में 125 एमबीबीएस सीटें हैं। इस तरह उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर राज्य के छह राजकीय मेडिकल कॉलेजों, चार निजी मेडिकल कॉलेजों और एम्स ऋषिकेश को मिलाकर कुल 1,700 एमबीबीएस सीटें बनती हैं। यदि रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज की 100 सीटों को नियामक मंजूरी मिल जाती है, तो यह संख्या बढ़कर 1,800 हो सकती है।
चिकित्सा शिक्षा विभाग का फोकस, प्रदेश में तैयार हों अधिक डॉक्टर
चिकित्सा शिक्षा विभाग के निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना के अनुसार, उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में प्रदेश डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के रूप में प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा। चिकित्सा शिक्षा के विस्तार से विद्यार्थियों को पढ़ाई के अधिक विकल्प मिलने के साथ प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुशल पेशेवर तैयार करने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, इसके लिए नए संस्थानों में शैक्षणिक सुविधाओं, पर्याप्त फैकल्टी, अस्पतालों और प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना भी जरूरी होगा।
हर जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि उत्तराखंड को चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार काम कर रही है। उन्होंने हर जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर योग्य डॉक्टर तैयार करना और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के लिए प्रदेश से बाहर जाने की जरूरत कम करना है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, सरकार का ध्यान मेडिकल शिक्षा के विस्तार के साथ स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच बेहतर बनाने पर भी है।
मेडिकल सीटें बढ़ने से विद्यार्थियों को क्या होगा लाभ?
एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ने से मेडिकल प्रवेश के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए अवसर बढ़ सकते हैं। नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों के संचालन से प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा का भौगोलिक विस्तार भी संभव है। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर डॉक्टरों की उपलब्धता बेहतर करने के लिए प्रशिक्षित विद्यार्थियों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने पर भी ध्यान देना होगा। फिलहाल, रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज की 100 एमबीबीएस सीटों की नियामक मंजूरी महत्वपूर्ण पड़ाव है। अनुमति मिलने और प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इन सीटों पर विद्यार्थियों को किस शैक्षणिक सत्र से प्रवेश मिल सकेगा।




