
नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दो अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। पहले मामले में अदालत ने देहरादून के बुजुर्ग दंपती को पुलिस उत्पीड़न और कानून की उचित प्रक्रिया के बिना संपत्ति से बेदखल किए जाने से सुरक्षा देने के निर्देश दिए हैं। वहीं, दूसरे मामले में हाईकोर्ट ने देहरादून में सात साल से लंबित दाखिल-खारिज के वाद को प्राथमिकता के आधार पर जल्द निपटाने की अपेक्षा जताई है।
बुजुर्ग दंपती की याचिका पर हाईकोर्ट सख्त
पहले मामले में 76 वर्षीय नरेंद्र सिंह रावत और 71 वर्षीय बीना रावत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पुलिस द्वारा कथित उत्पीड़न और संपत्ति से जबरन बेदखल करने की कोशिशों का मुद्दा उठाया था। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकल पीठ ने की। अदालत ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून को निर्देश दिया कि जोगीवाला थाने की पुलिस या कोई अन्य अधिकारी याचिकाकर्ता बुजुर्ग दंपती को किसी भी तरह प्रताड़ित न करे। साथ ही, कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना उन्हें उनकी संपत्ति से बेदखल नहीं किया जाए। हाईकोर्ट ने बुजुर्ग दंपती के बेटे अमित रावत और बहू रुचि रावत को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 22 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
देखभाल की उम्मीद में बेटे को गिफ्ट डीड से दी थी संपत्ति
याचिका के अनुसार, नरेंद्र सिंह रावत और बीना रावत ने अपने बेटे अमित रावत को गिफ्ट डीड के माध्यम से संपत्ति इस उम्मीद में दी थी कि बेटा और बहू उनकी देखभाल करेंगे। आरोप है कि अपेक्षित देखभाल नहीं मिलने पर बुजुर्ग दंपती ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत गिफ्ट डीड रद्द कराने के लिए आवेदन किया। इसी दौरान याचिका में आरोप लगाया गया कि बहू रुचि रावत ने संबंधित संपत्ति अन्य व्यक्तियों को सेल डीड के जरिए बेच दी। बुजुर्ग दंपती के अधिवक्ता सागर कोठारी ने अदालत में पक्ष रखते हुए आरोप लगाया कि संपत्ति की बिक्री के बाद जोगीवाला थाने की पुलिस उन पर समझौता करने का दबाव बना रही थी। साथ ही, उन्हें घर से बेदखल करने की धमकियां भी दी जा रही थीं। इन आरोपों के बीच हाईकोर्ट ने पुलिस को बुजुर्ग दंपती को प्रताड़ित नहीं करने और उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मामले में आगे की सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों का जवाब भी महत्वपूर्ण होगा।
सात साल से लंबित दाखिल-खारिज मामले पर भी हाईकोर्ट का रुख
एक अन्य मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून में सात साल से लंबित दाखिल-खारिज वाद का शीघ्र निस्तारण करने की अपेक्षा जताई है। यह मामला प्रवीण दुर्गा व अन्य बनाम दून हाउसिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड एवं अन्य से संबंधित है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रविंद्र मैठानी ने की। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिजित नेगी ने अदालत को बताया कि वर्ष 1969 में सेल डीड के बाद वर्ष 2002 में राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज किया गया था, जिसे बाद में निरस्त कर दिया गया। इस पूरे मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) द्वारा भी की गई थी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इसके बावजूद दाखिल-खारिज से जुड़ी कार्यवाही देहरादून की अपर तहसीलदार अदालत में पिछले सात वर्षों से लंबित है।
हाईकोर्ट ने प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण की जताई अपेक्षा
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रविंद्र मैठानी ने कहा कि दाखिल-खारिज की कार्यवाही का निस्तारण यथाशीघ्र होना चाहिए। अदालत ने माना कि पुराने मामलों की प्राथमिकता और संबंधित न्यायालय के कार्यभार को देखते हुए किसी निश्चित समयसीमा का निर्धारण करना संभव नहीं है। हालांकि, हाईकोर्ट ने अपेक्षा जताई कि संबंधित राजस्व न्यायालय इस मामले को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द निपटाए। इसके बाद हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर 2026 को इस रिट याचिका का निस्तारण कर दिया।
दोनों मामलों में क्या है अहम संदेश?
इन दोनों मामलों में हाईकोर्ट के निर्देश अलग-अलग कानूनी मुद्दों से जुड़े हैं। बुजुर्ग दंपती के मामले में अदालत ने पुलिस कार्रवाई और संपत्ति से बेदखली को लेकर उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। वहीं, दाखिल-खारिज मामले में लंबे समय से लंबित राजस्व कार्यवाही को प्राथमिकता के आधार पर जल्द निपटाने की अपेक्षा जताई गई है। दोनों मामलों में आगे की कार्रवाई संबंधित पुलिस अधिकारियों और राजस्व न्यायालय के स्तर पर महत्वपूर्ण होगी।




