त्योहारों से पहले महंगाई का झटका! उत्तराखंड में 5.47% पहुंची महंगाई दर, ग्रामीण इलाकों पर ज्यादा असर

देहरादून: त्योहारों के मौसम में महंगाई ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों तक, बढ़ती कीमतों का असर घरेलू बजट पर पड़ सकता है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में उत्तराखंड की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.47 प्रतिशत बताई गई है, जबकि अगस्त में यह 4.65 प्रतिशत थी। यानी एक महीने के भीतर महंगाई दर में 0.82 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी दर्ज होने का दावा किया गया है। महंगाई में इस बढ़ोतरी का असर ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में दिखाई देने की बात कही गई है। हालांकि, इन राज्यवार आंकड़ों और रैंकिंग को प्रकाशित करने से पहले राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की आधिकारिक रिपोर्ट से मिलान करना जरूरी है।
ग्रामीण इलाकों में महंगाई का दबाव ज्यादा
दिए गए आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर अगस्त के 5.09 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 5.95 प्रतिशत हो गई। वहीं, शहरी क्षेत्रों में यह 3.88 प्रतिशत से बढ़कर 4.63 प्रतिशत बताई गई है। इन आंकड़ों के आधार पर ग्रामीण इलाकों में महंगाई का दबाव शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक नजर आता है। खाद्य पदार्थों, घरेलू जरूरतों और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी होने पर सीमित आय वाले परिवारों का बजट ज्यादा प्रभावित हो सकता है।
देश में भी बढ़ी खुदरा महंगाई
राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, भारत की खुदरा महंगाई दर अगस्त 2026 में 4.82 प्रतिशत थी, जो सितंबर में बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई। इसी अवधि में खाद्य महंगाई दर 5.95 प्रतिशत से बढ़कर 7.74 प्रतिशत बताई गई है। खाद्य महंगाई में वृद्धि का सीधा संबंध आम लोगों की रसोई के बजट से है। सब्जियों, मसालों और अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी आने पर परिवारों को रोजमर्रा के खर्चों में बदलाव करना पड़ सकता है।
प्याज, लहसुन और अदरक की कीमतों पर नजर
दिए गए आंकड़ों में कुछ खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर में तेज उछाल का दावा किया गया है। प्याज की महंगाई दर अगस्त में 48.27 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 108.09 प्रतिशत बताई गई है। लहसुन के लिए 54.62 प्रतिशत और अदरक के लिए 62.85 प्रतिशत की दर का उल्लेख किया गया है। नींबू की महंगाई दर 36.41 प्रतिशत बताई गई है। इसके विपरीत, टमाटर की महंगाई दर -8.62 प्रतिशत और आलू की -11.50 प्रतिशत बताई गई है। इसका अर्थ है कि संबंधित अवधि में इन वस्तुओं के मूल्य सूचकांक में पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले गिरावट दर्ज होने का संकेत मिलता है। इन वस्तुवार आंकड़ों की पुष्टि भी आधिकारिक रिपोर्ट से की जानी चाहिए।
उत्तराखंड में महंगाई की स्थिति पर क्यों है नजर?
उत्तराखंड के कई पर्वतीय क्षेत्रों में सामान की ढुलाई और परिवहन लागत भी कीमतों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, महंगाई में किसी विशेष वस्तु की कीमत बढ़ने के पीछे उत्पादन, आपूर्ति, मौसम और परिवहन सहित कई कारण हो सकते हैं। इसलिए केवल परिवहन लागत को महंगाई का एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता। त्योहारों के दौरान खाद्य सामग्री और घरेलू सामान की मांग बढ़ने से भी परिवारों के खर्च पर दबाव पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले समय में कीमतों की स्थिति और महंगाई दर में होने वाले बदलाव पर लोगों की नजर रहेगी।




