
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है। प्रेमनगर थाना क्षेत्र में साइबर ठगों ने एक बुजुर्ग दंपति को कथित तौर पर करीब 60 घंटे तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर मानसिक दबाव में रखा और उनसे 45.85 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने दंपति को डराया कि उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल आतंकी घटना में हुआ है और उनके बच्चों की जान भी खतरे में पड़ सकती है। पीड़ित की शिकायत पर प्रेमनगर थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मोबाइल नंबर का आतंकी घटना से संबंध बताकर डराया
पीड़ित की शिकायत के मुताबिक, वह वर्ष 2014 में आईटीसी से सेवानिवृत्त हुए थे। उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। एक बेटा विदेश में रहता है, जबकि दूसरा दिल्ली में नौकरी करता है। उनकी बेटी की शादी देहरादून में ही हुई है। शिकायत के अनुसार, 16 अगस्त के आसपास बुजुर्ग के मोबाइल पर अज्ञात लोगों के फोन आने शुरू हुए। इनमें से एक व्यक्ति ने खुद को महाराष्ट्र मुख्यालय की क्राइम ब्रांच का सब-इंस्पेक्टर रंजीत कुमार बताया। फोन करने वाले ने दावा किया कि उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल आतंकी घटना में किया गया है और इस मामले में उनसे पूछताछ की जानी है। इसके बाद आरोपियों ने दंपति से उनके तीनों बच्चों की जानकारी और उनके ठिकानों के बारे में पूछा। बच्चों की सुरक्षा को लेकर डर दिखाकर कथित तौर पर दंपति पर दबाव बनाया गया। लगातार फोन और वीडियो कॉल के जरिए उन पर नजर रखी गई, जिससे वे किसी दूसरे व्यक्ति से संपर्क कर मदद मांगने की स्थिति में नहीं रहे।
RBI के नाम पर अलग-अलग खातों में जमा कराए 45.85 लाख रुपये
शिकायत के अनुसार, साइबर ठगों ने दंपति से कहा कि जांच पूरी करने के लिए उनकी रकम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के खाते में जमा करानी होगी। आरोपियों ने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद पूरी राशि वापस कर दी जाएगी। इसी झांसे में आकर दंपति ने 21 से 27 अगस्त के बीच चार बार RTGS और एक बार नकद जमा के माध्यम से कुल 45.85 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में जमा करा दिए। आरोप है कि रकम जमा कराने के बाद भी ठगों ने दंपति पर दबाव बनाना बंद नहीं किया। उनसे जमीन बेचकर अतिरिक्त रकम देने के लिए भी कहा गया। इस तरह ठगी के साथ-साथ दंपति को लगातार भय और मानसिक दबाव में रखने का प्रयास किया गया।
बेटी के घर पहुंचने पर सामने आया मामला
दंपति करीब 60 घंटे तक कथित तौर पर साइबर ठगों के डर और दबाव में रहे। इस दौरान उनकी बेटी लगातार फोन कर रही थी, लेकिन माता-पिता उसकी कॉल नहीं उठा रहे थे। शिकायत के मुताबिक, 3 अक्टूबर को बेटी अचानक अपने माता-पिता के घर पहुंची। वहां उसने दोनों को लंबे समय से वीडियो कॉल पर बातचीत करते देखा। बेटी ने जब इस बारे में सवाल किया तो घबराए हुए दंपति ने कॉल काट दी। इसके बाद कथित आरोपियों ने उनसे संपर्क नहीं किया। बेटी के हस्तक्षेप के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ और पुलिस तक शिकायत पहुंची।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, बैंक खातों की जांच जारी
प्रेमनगर थाना प्रभारी गिरीश नेगी के मुताबिक, पीड़ित की शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और आरोपियों की पहचान से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है। यह मामला एक बार फिर साइबर अपराधियों के उस तरीके की ओर ध्यान दिलाता है, जिसमें पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर लोगों को गंभीर अपराध में फंसाने का डर दिखाया जाता है और फिर पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया जाता है। ध्यान रखें कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर फोन या वीडियो कॉल के जरिए किसी को डराकर पैसे जमा कराने की मांग साइबर ठगी का संकेत हो सकती है। ऐसे मामलों में घबराकर रकम ट्रांसफर करने के बजाय संबंधित पुलिस या साइबर क्राइम एजेंसी से आधिकारिक माध्यमों से संपर्क करना चाहिए।




