उत्तराखंडहरिद्वार

कांग्रेस की दिल्ली रैली पर आलोक कुमार की सलाह, बोले- व्यापारियों का ध्यान रख 10 नवंबर के बाद करें आयोजन

हरिद्वार: विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने दिल्ली में 1 नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस की रैली को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में रैली करना राजनीतिक दलों का अधिकार है, लेकिन वह कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे मुद्दों से सहमत नहीं हैं। उन्होंने व्यापारियों की चिंताओं का हवाला देते हुए कांग्रेस को रैली 10 नवंबर के बाद आयोजित करने की सलाह दी। आलोक कुमार हरिद्वार स्थित पतंजलि विश्वविद्यालय में आयोजित प्राच्य विद्या सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने कांग्रेस की रैली, ईवीएम, चीन सीमा और सनातन धर्मग्रंथों में कथित प्रक्षिप्त अंशों से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।

कांग्रेस की रैली को लेकर व्यापारियों का दिया हवाला

दिल्ली में कांग्रेस ने 1 नवंबर को बड़ी रैली आयोजित करने की घोषणा की है। इसको लेकर आलोक कुमार ने कहा कि त्योहारों के दौरान व्यापारियों को कारोबार प्रभावित होने की चिंता है और उन्होंने कांग्रेस नेताओं को पत्र लिखकर अपनी परेशानी भी बताई है। ऐसे में कांग्रेस को व्यापारियों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए 10 नवंबर के बाद रैली करनी चाहिए थी।

ईवीएम और वोट चोरी के आरोपों पर भी उठाए सवाल

वोट चोरी के आरोपों पर असहमति जताते हुए आलोक कुमार ने विपक्ष की ओर से ईवीएम पर उठाए जाने वाले सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हाल ही में 28 स्थानों पर बैलेट पेपर से चुनाव हुए, ऐसे में सवाल है कि वहां कांग्रेस क्यों नहीं जीत पाई। हालांकि, बनारस की सीट पर हार को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

चीन सीमा पर पैनिक फैलाना गलत: आलोक कुमार

चीन की ओर से भारतीय सीमा पर कथित दखलंदाजी की खबरों पर आलोक कुमार ने कहा कि इस मुद्दे पर पैनिक या भ्रम फैलाना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, सीमा से जुड़े विषयों और व्यवस्थाओं को लेकर पर्याप्त बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर गश्त के दौरान चीनी सैनिकों के भारतीय क्षेत्र में आने जैसी स्थितियों को रोकने के लिए चर्चा की जा रही है। इसलिए इस मामले में अनावश्यक चिंता या भ्रम फैलाने से बचना चाहिए।

सनातनी ग्रंथों में प्रक्षिप्त अंशों की पहचान की जरूरत

प्राच्य विद्या सम्मेलन में सनातन धर्मग्रंथों को लेकर आलोक कुमार ने कहा कि हिंदू समाज के खिलाफ षड्यंत्र के तहत कुछ ग्रंथों में ऐसे अंश जोड़े गए हैं, जिन्हें उन्होंने प्रक्षिप्त बताया। उनके अनुसार, कुछ अंश भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की मूल भावना से मेल नहीं खाते। उन्होंने कहा कि भारतीय आध्यात्मिक दृष्टि प्रत्येक मनुष्य में ईश्वर का वास मानती है और किसी को छोटा-बड़ा, छूत-अछूत नहीं मानती। ऐसे कथित प्रक्षिप्त अंशों की पहचान करने, उनके प्रमाण जुटाने और उन्हें ग्रंथों से हटाने के उद्देश्य से पतंजलि में स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के नेतृत्व में प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने इस पहल का स्वागत किया।

संविधान में हर व्यक्ति को समानता और गरिमा का अधिकार

आलोक कुमार ने आगे कहा कि यदि किसी ग्रंथ में ऐसा कोई अंश मौजूद है, जो मानवीय गरिमा और समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है, तो वर्तमान हिंदू समाज उसे अस्वीकार करता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक व्यक्ति को समानता और गरिमा का अधिकार देता है और हिंदू आध्यात्मिक दृष्टि भी इस विचार को स्वीकार करती है। हरिद्वार में आयोजित प्राच्य विद्या सम्मेलन के दौरान दिए गए आलोक कुमार के इन बयानों में कांग्रेस की प्रस्तावित रैली से लेकर चीन सीमा और धार्मिक ग्रंथों से जुड़े विषय चर्चा में

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