उत्तराखंड में 12 दिसंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत, 11 दिसंबर तक करा लें केस का पंजीकरण

उत्तराखंड में लंबित न्यायिक मामलों और वाद-पूर्व विवादों के त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए 12 दिसंबर 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशों और उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के तत्वावधान में आयोजित होने वाली यह लोक अदालत सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी।
प्रदेशभर के न्यायालयों में होगा आयोजन
उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव प्रदीप कुमार मणी ने जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, नैनीताल और प्रदेश के सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के सहयोग से किया जाएगा। इस दौरान उत्तराखंड उच्च न्यायालय, सभी जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों, पारिवारिक न्यायालयों, श्रम न्यायालयों, वाणिज्यिक न्यायालयों, राज्य एवं जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोगों तथा देहरादून स्थित ऋण वसूली अधिकरण में विभिन्न प्रकार के मामलों का निस्तारण किया जाएगा। राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से पात्र मामलों में संबंधित पक्ष आपसी सहमति से विवाद का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। इससे न्यायिक प्रक्रिया को सरल बनाने और लंबे समय से लंबित मामलों के निपटारे में मदद मिल सकती है।
11 दिसंबर तक करा सकते हैं पंजीकरण
उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि जो लोग अपने लंबित मामलों अथवा वाद-पूर्व (प्री-लिटिगेशन) विवादों का समाधान राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से कराना चाहते हैं, वे 11 दिसंबर 2026 तक संबंधित न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। आवेदन किसी भी कार्यदिवस में स्वयं या अपने अधिवक्ता के माध्यम से दिया जा सकता है। इसके बाद संबंधित मामले को राष्ट्रीय लोक अदालत में सुनवाई और निस्तारण के लिए सूचीबद्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
अधिक जानकारी के लिए कहां करें संपर्क?
राष्ट्रीय लोक अदालत में मामलों की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और अन्य आवश्यक जानकारियों के लिए इच्छुक व्यक्ति उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल अथवा अपने संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क कर सकते हैं। 12 दिसंबर को आयोजित होने वाली इस राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य पात्र मामलों में पक्षकारों को आपसी सहमति के आधार पर विवाद सुलझाने का अवसर उपलब्ध कराना है। जिन लोगों के मामले लंबे समय से लंबित हैं या जिनका विवाद अभी न्यायालय में जाने से पहले के चरण में है, वे निर्धारित समयसीमा के भीतर संबंधित प्राधिकरण से संपर्क कर सकते हैं।




