
पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में आदि कैलाश यात्रा के दौरान मध्य प्रदेश के एक 27 वर्षीय युवक की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। मृतक की पहचान इंदौर निवासी तिलक शर्मा के रूप में हुई है। यात्रा के दौरान अचानक सांस लेने में परेशानी होने पर उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। घटना के बाद उनके साथ यात्रा कर रहे दोस्तों और परिजनों में शोक की लहर है।
आदि कैलाश से लौटते समय बिगड़ी तबीयत
जानकारी के अनुसार, तिलक शर्मा (27) पुत्र मनोज शर्मा, निवासी नगर निगम रोड के निकट, 24 शटर गली, इंदौर (मध्य प्रदेश) अपने सात दोस्तों के साथ आदि कैलाश यात्रा पर आए थे। आदि कैलाश रवाना होने से पहले इस दल ने नीम करोली बाबा, जागेश्वर और मुक्तेश्वर के दर्शन किए थे। इसके बाद नैनीताल घूमने के बाद सभी आदि कैलाश पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि आदि कैलाश के दर्शन कर वापस लौटते समय अचानक तिलक को सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी। उन्हें ऑक्सीजन की कमी महसूस हुई। साथियों ने अपने पास मौजूद ऑक्सीजन किट से उन्हें ऑक्सीजन देने का प्रयास किया, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ।
आर्मी बेस कैंप में भी नहीं बची जान
तबीयत बिगड़ने पर दोस्तों ने उन्हें तत्काल वाहन से आर्मी बेस कैंप पहुंचाया। जानकारी के मुताबिक, रात करीब आठ बजे वहां चिकित्सकों ने उन्हें इंजेक्शन और जरूरी दवाइयां दीं। प्राथमिक उपचार के बाद भी स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर उन्हें दूसरे बेस कैंप स्थित बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई। बताया गया कि अस्पताल पहुंचने के करीब 10 से 15 मिनट बाद तिलक शर्मा ने दम तोड़ दिया। इसके बाद उनका शव धारचूला लाया गया, जहां राजकीय चिकित्सालय में रखा गया है। पुलिस की ओर से पंचायतनामा और पोस्टमार्टम की कार्रवाई कराई जा रही है। धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी ने बताया कि यात्री की मौत की सूचना मिली है। पुलिस पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।
इंदौर के सराफा बाजार में थी दुकान, महाकाल मंदिर के लिए बनाते थे चांदी के आभूषण
तिलक शर्मा इंदौर के प्रसिद्ध सराफा बाजार में अपनी दुकान संचालित करते थे। वह उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर के लिए विशेष चांदी के मुकुट और श्रृंगार सामग्री तैयार करने का काम करते थे। जानकारी के अनुसार, उनके बनाए चांदी के नेत्र, कान के आभूषण, टीका और छत्र जैसी सामग्री मंदिर में भगवान के श्रृंगार के लिए भेजी जाती थी। उनके सोशल मीडिया पेज पर भी महाकाल मंदिर के लिए चांदी के मुकुट तैयार करने से जुड़े कई वीडियो मौजूद हैं।
परिवार का इकलौता बेटा था तिलक, अगले साल होनी थी शादी
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, तिलक अपने परिवार के इकलौते बेटे थे। उनके पिता भी उनके साथ दुकान के काम में हाथ बंटाते थे। परिवार में अगले साल होली के बाद उनकी शादी तय थी। लेकिन आदि कैलाश यात्रा के दौरान हुई इस दुखद घटना ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया।
इस साल आदि कैलाश यात्रा में तीन श्रद्धालुओं की मौत
बताया जा रहा है कि इस वर्ष आदि कैलाश यात्रा पर आए अब तक तीन श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। इससे पहले भी पीएम सुधीर नाम के एक श्रद्धालु की वापसी के दौरान धारचूला पहुंचने पर तबीयत बिगड़ गई थी और कुछ समय बाद उनकी मौत हो गई थी। आदि कैलाश क्षेत्र अधिक ऊंचाई पर स्थित है। ऐसे स्थानों पर कम ऑक्सीजन के कारण सांस लेने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, तिलक शर्मा की मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
कहां स्थित है आदि कैलाश?
आदि कैलाश उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला उपखंड में भारत-तिब्बत सीमा के निकट स्थित है। इसे छोटा कैलाश, शिव कैलाश, बाबा कैलाश और जोंगलिंगकोंग चोटी के नाम से भी जाना जाता है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई लगभग 5,945 मीटर बताई जाती है। आदि कैलाश को तिब्बत स्थित मुख्य कैलाश पर्वत की प्रतिकृति माना जाता है। भारत की सीमा में स्थित होने के कारण यहां जाने के लिए वीजा की आवश्यकता नहीं होती, हालांकि यात्रा के लिए निर्धारित इनर लाइन परमिट लेना जरूरी होता है।



