
उत्तराखंड में ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को मोटे मुनाफे का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने पर्दाफाश किया है। गिरोह के सदस्य ‘बॉटप्रो’ (BotBro), ‘बॉटअल्फा’ (BotAlpha) और ‘क्यूएफएक्स’ (QFX) जैसे कथित ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसा रहे थे। निवेश पर भारी रिटर्न और मुफ्त विदेश यात्राओं का प्रलोभन देकर आम लोगों से रकम जुटाई जा रही थी। इस मामले में STF की ओर से गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने कार्रवाई करते हुए दो मुख्य आरोपियों नवीन सिंह नेगी और कविता परमार को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में इस नेटवर्क के तार देश के बाहर बैठे कथित सरगना तक जुड़े होने की बात सामने आई है। पुलिस अब पूरे गिरोह की कार्यप्रणाली, पैसों के लेनदेन और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
विदेश से नेटवर्क संचालित करने का आरोप
STF की प्रारंभिक जांच के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क का कथित मुख्य सरगना लविश चौधरी है, जो विदेश में रहकर इन ऑनलाइन कंपनियों का संचालन कर रहा था। गिरोह के सदस्य लोगों तक पहुंच बनाने और उन्हें निवेश के लिए तैयार करने के लिए सोशल मीडिया, जूम मीटिंग और व्हाट्सएप ग्रुप का इस्तेमाल करते थे। आरोपियों ने लोगों को जोड़ने के लिए रेफरल नेटवर्क तैयार किया था। इसके माध्यम से नए लोगों को प्लेटफॉर्म से जुड़ने और अधिक से अधिक रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया जाता था। निवेशकों को भरोसा दिलाया जाता था कि इन प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने से उन्हें कम समय में बड़ा मुनाफा मिल सकता है। इसी तरह आकर्षक दावों और प्रचार के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को इस कथित निवेश योजना से जोड़ा गया।
कविता परमार की रोबो आईडी से जुड़े थे 10 से 15 हजार लोग
जांच के दौरान STF को पता चला कि गिरफ्तार महिला आरोपी कविता परमार की रोबो आईडी से करीब 10 से 15 हजार लोग जुड़े हुए थे। यह आंकड़ा इस नेटवर्क के व्यापक विस्तार की ओर इशारा करता है। गिरोह लोगों को हर महीने लगभग 1,000 अमेरिकी डॉलर तक का मुनाफा मिलने और मुफ्त विदेश यात्राएं कराने जैसे प्रलोभन देता था। आकर्षक रिटर्न और सुविधाओं के इन दावों के चलते कई लोग निवेश के लिए तैयार हो गए। STF के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों ने इन कथित ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर अपनी मेहनत की कमाई लगाई और ठगी का शिकार हुए। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन प्लेटफॉर्म के माध्यम से कितनी रकम जुटाई गई और कितने निवेशकों को नुकसान पहुंचा है।
RBI और SEBI में पंजीकरण नहीं होने का खुलासा
इस मामले की जांच में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि BotBro, BotAlpha और QFX के नाम से संचालित किए जा रहे प्लेटफॉर्म का भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) या भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) जैसी संबंधित वित्तीय नियामक संस्थाओं में पंजीकरण नहीं था। इसके बावजूद इन प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों को निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर रकम लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा था। STF ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। इन मोबाइल फोन की जांच के दौरान नेटवर्क से जुड़े डिजिटल साक्ष्य और महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने की बात सामने आई है। पुलिस इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों, निवेशकों से संपर्क करने के तरीकों और कथित वित्तीय नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी के लेनदेन की जांच
STF अब इस पूरे मामले में वित्तीय लेनदेन की गहराई से जांच कर रही है। आरोपियों के बैंक खातों, संदिग्ध ट्रांजेक्शन और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से हुए संभावित लेनदेन की पड़ताल की जा रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम किन खातों में पहुंची, उसे किन माध्यमों से आगे भेजा गया और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पैसे का प्रवाह किस तरह हुआ। इसके साथ ही गिरोह के स्थानीय एजेंटों, सहयोगियों और रेफरल नेटवर्क के जरिए लोगों को जोड़ने वाले व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। STF यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित ठगी नेटवर्क का संचालन किन-किन स्थानों से किया जा रहा था और इसमें कितने लोग सक्रिय रूप से शामिल थे।
ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी से बचने की STF की अपील
इस कार्रवाई के बाद उत्तराखंड STF ने आम नागरिकों से ऑनलाइन निवेश योजनाओं को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। STF ने कहा है कि अधिक मुनाफे, कम समय में पैसा दोगुना करने और मुफ्त विदेश यात्राओं जैसे आकर्षक प्रस्तावों के झांसे में आकर किसी भी अनधिकृत प्लेटफॉर्म पर अपनी मेहनत की कमाई निवेश न करें। किसी भी कंपनी या ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधानिक स्थिति, संबंधित नियामक संस्था में पंजीकरण और उपलब्ध दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच करना जरूरी है। विशेष रूप से सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और ऑनलाइन मीटिंग के माध्यम से प्रचारित की जा रही निवेश योजनाओं के प्रति सावधानी बरतनी चाहिए। STF की इस कार्रवाई को ऑनलाइन निवेश के नाम पर चलाए जा रहे कथित ठगी नेटवर्क के खिलाफ महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, पूरे नेटवर्क का खुलासा, ठगी की कुल रकम और इसमें शामिल अन्य आरोपियों की भूमिका का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।




