उत्तराखंड

दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर सिक्किम में विरोध, SDF की कोमल चामलिंग ने केंद्र से पूछे सवाल

भाजपा के वरिष्ठ नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद इस फैसले को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। उत्तराखंड के अंकिता भंडारी हत्याकांड का जिक्र करते हुए सिक्किम की प्रमुख विपक्षी पार्टी सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (SDF) ने उनकी नियुक्ति पर आपत्ति जताई है। पार्टी की महिला इकाई चेली मोर्चा की प्रभारी कोमल चामलिंग ने प्रेस बयान और वीडियो संदेश के जरिए केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। कोमल चामलिंग पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग की बेटी हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर नियुक्ति करते समय महिलाओं की सुरक्षा, जनभावनाओं और सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़े सवालों को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। एसडीएफ ने इस मुद्दे पर सिक्किम की मौजूदा सरकार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

अंकिता भंडारी मामले का किया गया जिक्र

दुष्यंत कुमार गौतम भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड के पार्टी प्रभारी रह चुके हैं। वर्ष 2022 में उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद एक कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। हाल के घटनाक्रम में गौतम का नाम सामने आने के बाद उनकी राज्यपाल नियुक्ति को लेकर विवाद और तेज हो गया है। अंकिता भंडारी के माता-पिता भी कथित वीआईपी एंगल की जांच और न्याय की मांग कर रहे हैं। इस मामले को लेकर उत्तराखंड में राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों और उसकी कानूनी जिम्मेदारी के संबंध में निष्कर्ष जांच तथा उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।

कोमल चामलिंग ने केंद्र सरकार से पूछे सवाल

एसडीएफ की महिला इकाई की प्रभारी कोमल चामलिंग ने नियुक्ति के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि संवेदनशील मामलों से जुड़े विवादों के बीच ऐसे संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों को लेकर जनता की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सिक्किम में बार-बार राज्यपाल बदले जाने के पीछे क्या कारण हैं और संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों के दौरान राज्य की भावनाओं को कितनी प्राथमिकता दी जा रही है। एसडीएफ ने केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य की सत्तारूढ़ सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (SKM) सरकार से भी इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की है।

महिला सुरक्षा और जवाबदेही पर जोर

कोमल चामलिंग ने अपने बयान में कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों को केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, महिलाओं से जुड़े गंभीर मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने सिक्किम की महिलाओं से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील भी की। एसडीएफ ने संकेत दिया है कि वह महिला सुरक्षा और न्याय से जुड़े सवालों पर अपना विरोध जारी रखेगी। पार्टी का कहना है कि सार्वजनिक पदों पर नियुक्तियों के दौरान जनता की संवेदनशीलता और भरोसे को महत्व दिया जाना चाहिए।

सिक्किम विश्वविद्यालय के छात्र संगठन ने भी जताया विरोध

इससे पहले सिक्किम विश्वविद्यालय छात्र संघ की ओर से भी दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति पर आपत्ति जताए जाने की खबर सामने आई थी। छात्र संगठन ने अंकिता भंडारी मामले का उल्लेख करते हुए नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद एसडीएफ की प्रतिक्रिया ने इस विवाद को और व्यापक राजनीतिक चर्चा का विषय बना दिया है।

अंकिता के माता-पिता भी कर रहे न्याय की मांग

दूसरी ओर, अंकिता भंडारी के माता-पिता कथित वीआईपी एंगल की जांच और न्याय की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। परिवार की मांग है कि मामले से जुड़े सभी सवालों की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। फिलहाल दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति को लेकर उत्तराखंड और सिक्किम में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक ओर एसडीएफ और कुछ छात्र संगठनों ने सवाल उठाए हैं, वहीं इस विवाद के केंद्र में अंकिता भंडारी मामले की निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग बनी हुई है।

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