
हरिद्वार: उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के लालढांग क्षेत्र में रवासन नदी पर लंबे समय से प्रस्तावित पुल निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के बाद लोक निर्माण विभाग ने रसूलपुर मंगोलपूरा, आर्यनगर और लालढांग के बीच 250 मीटर लंबे पैदल स्टील ट्रस पुल के निर्माण को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दे दी है। शासनादेश की जानकारी मिलने के बाद पिछले करीब एक महीने से पुल की मांग को लेकर चल रहा ग्रामीणों का अनशन समाप्त हो गया। यह पुल क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। स्थानीय ग्रामीणों को लंबे समय से रवासन नदी पार करके आसपास के गांवों तक पहुंचना पड़ता है। बरसात के दौरान नदी का तेज बहाव इस रास्ते को और खतरनाक बना देता है। क्षेत्र में नदी पार करते समय लोगों की जान जाने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
करीब 50 साल पुरानी मांग को मिली मंजूरी
लालढांग क्षेत्र के ग्रामीण पिछले करीब पांच दशक से रवासन नदी पर पुल बनाने की मांग कर रहे थे। पुल नहीं होने के कारण लोगों को नदी पार करके एक गांव से दूसरे गांव जाना पड़ता है। मानसून के दौरान नदी में पानी बढ़ने पर आवागमन जोखिम भरा हो जाता है। बीते मानसून में छात्र आर्यन भट्ट नदी पार करते समय तेज बहाव में बह गया था, जिससे उसकी मौत हो गई। इससे पहले भी नदी में डूबने की घटना सामने आने की जानकारी दी गई है। इन घटनाओं के बाद क्षेत्र में सुरक्षित आवागमन के लिए पुल निर्माण की मांग और तेज हो गई।
एक महीने से चल रहा था ग्रामीणों का अनशन
पुल निर्माण की मांग को लेकर कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने सितंबर में रवासन नदी में जल सत्याग्रह किया था और आमरण अनशन की चेतावनी दी थी। इसके बाद भाजपा के स्थानीय जिला पंचायत सदस्य बृज मोहन पोखरियाल के नेतृत्व में ग्रामीणों ने भी अनशन शुरू कर दिया। ग्रामीणों की एक सूत्रीय मांग थी कि रवासन नदी पर पुल निर्माण का काम जल्द शुरू किया जाए। पिछले करीब एक महीने से जारी इस आंदोलन के दौरान कई अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे लिखित स्वीकृति मिलने तक अपनी मांग पर अड़े रहे।
₹91.24 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति
लोक निर्माण विभाग की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार, रवासन नदी पर प्रस्तावित पैदल स्टील ट्रस पुल की अनुमानित लागत 934.07 लाख रुपये थी। शासन स्तर पर परीक्षण के बाद 912.40 लाख रुपये की धनराशि को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस तरह परियोजना के लिए करीब 9.12 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति मिली है। पुल की लंबाई 250 मीटर प्रस्तावित है। यह रसूलपुर मंगोलपूरा, आर्यनगर और लालढांग क्षेत्र के बीच आवागमन को सुगम बनाने के उद्देश्य से बनाया जाएगा।
स्वामी यतीश्वरानंद और अधिकारियों ने ग्रामीणों को दी जानकारी
स्वीकृति और शासनादेश जारी होने के बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ रसूलपुर पहुंचे। यहां ग्रामीणों को पुल निर्माण की स्वीकृति के बारे में बताया गया। अधिशासी अभियंता योगेश कुमार ने शासनादेश पढ़कर सुनाया और निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया की जानकारी दी। इसके बाद ग्रामीणों ने पुल निर्माण को मंजूरी मिलने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वामी यतीश्वरानंद का आभार जताया। शासनादेश की जानकारी मिलने के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया। स्वामी यतीश्वरानंद ने कहा कि क्षेत्र में करीब 50 साल से पुल की मांग की जा रही थी और इसके निर्माण से स्थानीय लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। उन्होंने बताया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पुल के शिलान्यास के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
अनुपमा रावत ने भी संघर्ष को बताया अहम
कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने कहा कि लालढांग क्षेत्र के लोग लंबे समय से रवासन नदी पर लोहे के पुल की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे थे। छात्र आर्यन भट्ट की मौत के बाद पुल की जरूरत और क्षेत्रवासियों की परेशानियां फिर सामने आईं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता के साथ आंदोलन और जल सत्याग्रह के माध्यम से पुल निर्माण की मांग उठाई गई। उनके अनुसार, स्वीकृति मिलना स्थानीय लोगों के लंबे संघर्ष का परिणाम है।
अब टेंडर और निर्माण प्रक्रिया पर नजर
रवासन नदी पर पुल निर्माण की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति मिलने से लालढांग क्षेत्र के ग्रामीणों को उम्मीद जगी है कि जल्द ही सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध होगी। हालांकि, निर्माण कार्य शुरू होने के लिए आगे की प्रक्रिया, जिसमें टेंडर और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं शामिल हैं, पूरी होनी बाकी है। अब स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि परियोजना की अगली प्रक्रियाएं कितनी जल्दी पूरी होती हैं और पुल का निर्माण कब शुरू होता है। पुल बनने से क्षेत्र के गांवों के बीच संपर्क बेहतर होने और नदी पार करने के दौरान होने वाले जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।




