
देहरादून: उत्तराखंड में मिनिस्टीरियल कर्मचारियों ने अपनी 12 सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार, 12 अक्टूबर को देहरादून में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे कर्मचारियों ने उत्तरांचल फेडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विसेज एसोसिएशन के बैनर तले परेड ग्राउंड में एकत्र होकर सचिवालय कूच किया। हालांकि, सचिवालय से पहले सुभाष रोड पर पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इस दौरान आगे बढ़ने की कोशिश को लेकर कर्मचारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। सचिवालय की ओर जाने का रास्ता बंद होने के बाद कर्मचारियों ने सड़क पर ही धरना शुरू कर दिया। संगठन ने स्पष्ट किया कि जब तक लंबित मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

डेढ़ साल से वार्ता, फिर भी शासनादेश जारी नहीं होने का आरोप
उत्तरांचल फेडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विसेज एसोसिएशन के प्रांतीय महामंत्री राकेश सिंह रावत ने कहा कि कर्मचारी पिछले करीब डेढ़ साल से अपनी 12 सूत्रीय मांगों को लेकर शासन के साथ लगातार वार्ता कर रहे हैं। उनके मुताबिक, बातचीत के दौरान जिन मांगों पर सहमति बनी थी, उन पर भी अब तक शासनादेश जारी नहीं हुआ है।रावत ने कहा कि कर्मचारियों ने सरकार को अपनी मांगों के समाधान के लिए पर्याप्त समय दिया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। संगठन का कहना है कि जब तक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, विरोध जारी रहेगा।

कनिष्ठ सहायक के ग्रेड वेतन और पदनाम में बदलाव की मांग
मिनिस्टीरियल कर्मचारियों ने कनिष्ठ सहायक के ग्रेड वेतन को लेवल-5 के अनुरूप अनुमन्य करने की मांग उठाई है। इसके साथ ही प्रधान सहायक और प्रशासनिक अधिकारी के पदों को समाहित करते हुए प्रशासनिक अधिकारी का पद सृजित करने की मांग भी रखी गई है। कर्मचारियों का कहना है कि पदों और वेतन संबंधी व्यवस्था में आवश्यक बदलाव से उनकी सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान हो सकेगा।
पदोन्नति और पदों के पुनर्गठन पर भी जोर
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने उन विभागों में पदोन्नति की समस्या उठाई, जहां लंबे समय से कर्मचारियों को आगे बढ़ने के अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। उनकी मांग है कि ऐसे विभागों में पदोन्नति और एसीपी (एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) से संबंधित व्यवस्था लागू की जाए। इसके अलावा, जिन विभागों में मिनिस्टीरियल संवर्ग के पदों का पुनर्गठन नहीं हुआ है, वहां जल्द से जल्द पुनर्गठन कराने की मांग भी की गई।
पुरानी पेंशन बहाली और गोल्डन कार्ड की समस्या उठाई
कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। संगठन के अनुसार, राज्य के 80 प्रतिशत कार्मिक सरकारी सेवा में होने के कारण पुरानी पेंशन योजना से वंचित हैं। कर्मचारियों ने अपने हितों को ध्यान में रखते हुए पुरानी पेंशन बहाली के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध करने की मांग की। इसके साथ ही गोल्डन कार्ड के तहत कर्मचारियों को आ रही असुविधाओं को तत्काल दूर करने की मांग भी रखी गई।
मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
देहरादून में हुए इस प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की। सचिवालय कूच के दौरान पुलिस की बैरिकेडिंग के चलते प्रदर्शनकारी आगे नहीं बढ़ सके और सुभाष रोड पर धरने पर बैठ गए। संगठन ने दोहराया कि केवल वार्ता से काम नहीं चलेगा, बल्कि सहमति वाली मांगों पर शासनादेश और अन्य मांगों पर ठोस कार्रवाई जरूरी है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार कर्मचारियों की 12 सूत्रीय मांगों पर क्या कदम उठाती है।




