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KBC के मंच पर छाई उत्तराखंड की संस्कृति, लोकेंद्र सोनी ने अमिताभ बच्चन को भेंट की पहाड़ी टोपी

देहरादून: किसी भी राज्य की पहचान केवल उसके प्राकृतिक सौंदर्य से नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति, परंपराओं और पारंपरिक पहनावे से भी होती है। जब किसी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है, तो यह पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय बन जाता है। ऐसा ही एक खास पल उत्तराखंड के लिए देखने को मिला, जब देहरादून के लोकेंद्र सोनी लोकप्रिय टीवी कार्यक्रम ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) में पारंपरिक पहाड़ी वेशभूषा पहनकर पहुंचे। KBC के मंच पर लोकेंद्र सोनी ने उत्तराखंड की संस्कृति और परंपरा को अपने पहनावे के माध्यम से प्रस्तुत किया। इतना ही नहीं, उन्होंने कार्यक्रम के दौरान सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को उत्तराखंड की प्रसिद्ध पहाड़ी टोपी भी भेंट की। इस पहल के जरिए प्रदेश की पारंपरिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने का अवसर मिला।

देहरादून के लोकेंद्र सोनी ने KBC में बनाई जगह

लोकेंद्र सोनी देहरादून की टीएचडीसी कॉलोनी के निवासी हैं। उन्होंने कौन बनेगा करोड़पति में शामिल होने के लिए चयन प्रक्रिया के कई कठिन चरणों को पार किया और अंतिम दो प्रतिभागियों में अपनी जगह बनाई। हालांकि, वह कार्यक्रम की हॉटसीट तक नहीं पहुंच सके, लेकिन KBC जैसे लोकप्रिय मंच पर उनकी मौजूदगी और उत्तराखंड की पारंपरिक वेशभूषा ने इस भागीदारी को खास बना दिया।

अमिताभ बच्चन को भेंट की उत्तराखंड की पारंपरिक पहाड़ी टोपी

कार्यक्रम में लोकेंद्र सोनी पहाड़ी वेशभूषा पहनकर पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने अमिताभ बच्चन को उत्तराखंड की प्रसिद्ध पहाड़ी टोपी भेंट स्वरूप दी। लोकेंद्र के अनुसार, पहाड़ी टोपी देखकर अमिताभ बच्चन काफी खुश हुए। उत्तराखंड की पहाड़ी टोपी प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक पहनावे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में देश के लोकप्रिय टेलीविजन कार्यक्रम के मंच पर इसका प्रस्तुत होना राज्य की लोक संस्कृति को पहचान दिलाने का एक खास अवसर है।

13 अक्टूबर को प्रसारित होगा कार्यक्रम

लोकेंद्र सोनी की KBC में भागीदारी से जुड़ा यह एपिसोड 13 अक्टूबर को रात 9 बजे प्रसारित होगा। कार्यक्रम के प्रसारण के साथ दर्शकों को देहरादून के लोकेंद्र सोनी और उनके जरिए KBC के मंच पर दिखाई गई उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति को देखने का अवसर मिलेगा। लोकेंद्र सोनी की यह पहल बताती है कि बड़े मंचों पर अपनी स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत करना किस तरह प्रदेश के लिए गर्व का क्षण बन सकता है।

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