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नाना पाटेकर का उत्तराखंड से था खास रिश्ता, जोशीमठ-नीती घाटी में बिताए थे 9 दिन; ऋषिकेश में की थी गंगा आरती

भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा स्थित अपने आवास पर 75 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। उन्हें कार्डियक अरेस्ट के बाद अस्पताल ले जाया गया, लेकिन करीब 45 मिनट तक CPR दिए जाने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। नाना पाटेकर का जन्म और शुरुआती जुड़ाव महाराष्ट्र से रहा, लेकिन उत्तराखंड की देवभूमि से भी उनका एक खास रिश्ता रहा। फिल्मों की शूटिंग के सिलसिले में उन्होंने उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में समय बिताया और यहां की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण से प्रभावित हुए।

जोशीमठ और नीती घाटी में बिताए थे करीब 9 दिन

नाना पाटेकर कई बार फिल्मों की शूटिंग के लिए उत्तराखंड पहुंचे थे। चमोली जिले के जोशीमठ और नीती घाटी में भी उन्होंने शूटिंग के दौरान करीब नौ दिन बिताए थे। पहाड़ों की खूबसूरती, शांत वातावरण और स्थानीय जीवन ने उन्हें काफी प्रभावित किया। बताया जाता है कि इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से बातचीत भी की थी। इसी दौरान उत्तराखंड में जमीन लेकर अपना घर बनाने की इच्छा भी उन्होंने जाहिर की थी। यानी नाना के लिए उत्तराखंड सिर्फ शूटिंग की लोकेशन नहीं था। पहाड़ों में बिताए समय ने उनके मन पर ऐसी छाप छोड़ी कि देवभूमि से उनका जुड़ाव शूटिंग खत्म होने के बाद भी बना रहा।

उत्तराखंड की शांति को पसंद करते थे नाना

स्थानीय लोगों के मुताबिक, नाना पाटेकर को पहाड़ों का शांत और सुकून भरा जीवन काफी पसंद आया था। फिल्मी दुनिया की भागदौड़ से अलग उत्तराखंड का वातावरण उन्हें आकर्षित करता था। जोशीमठ और नीती घाटी में बिताए दिनों के दौरान उनका स्थानीय लोगों से भी संवाद हुआ। यही वजह रही कि उत्तराखंड से उनका रिश्ता सिर्फ फिल्मों और शूटिंग तक सीमित नहीं रहा।

ऋषिकेश में की थी गंगा आरती

नाना पाटेकर का उत्तराखंड से जुड़ाव चमोली तक ही सीमित नहीं था। 29 सितंबर 2022 को उन्होंने ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में गंगा आरती में भी हिस्सा लिया था। गंगा किनारे आध्यात्मिक वातावरण में उनकी मौजूदगी ने भी लोगों का ध्यान खींचा था। ऋषिकेश की गंगा और देवभूमि के आध्यात्मिक माहौल से उनका जुड़ाव उत्तराखंड के प्रति उनके लगाव की एक और झलक माना गया।

करीब पांच दशक तक सिनेमा पर रहा नाना का प्रभाव

नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा में लगभग पांच दशकों तक अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी आवाज, संवाद अदायगी और अभिनय की तीव्रता उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती थी। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘प्रहार’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी’, ‘वेलकम’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके निभाए किरदार आज भी दर्शकों के बीच याद किए जाते हैं। उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले और वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।

पर्दे का दमदार कलाकार, यादों में हमेशा जिंदा रहेंगे नाना

नाना पाटेकर का जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने सिर्फ किरदार निभाए नहीं, बल्कि उन्हें अपनी आवाज, हावभाव और दमदार अभिनय से जीवंत कर दिया। उत्तराखंड के पहाड़ों से लेकर मुंबई के फिल्मी पर्दे तक नाना पाटेकर की अपनी एक अलग पहचान रही। देवभूमि में बिताए उनके दिन और ऋषिकेश की गंगा आरती से जुड़ी उनकी यादें उत्तराखंड के लोगों के लिए भी उनकी जिंदगी का एक खास अध्याय रहेंगी। नाना पाटेकर भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके निभाए किरदार, उनकी आवाज और उनका बेमिसाल अभिनय आने वाली पीढ़ियों तक उन्हें याद दिलाता रहेगा।

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