देहरादून

उत्तराखंड SIR पर कांग्रेस का बड़ा आरोप, मनोज रावत बोले- फॉर्म 7 के दुरुपयोग से वोटरों के नाम काटने की कोशिश

देहरादून: उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग की ओर से 3 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी किए जाने के बाद कांग्रेस ने पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का दावा है कि SIR और उससे पहले की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। पार्टी ने इन आंकड़ों को सार्वजनिक करने और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाया है। कांग्रेस नेता और केदारनाथ के पूर्व विधायक मनोज रावत ने देहरादून स्थित कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर SIR को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में करीब 13.85 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने की स्थिति सामने आई है और निर्वाचन आयोग इस कटौती के वास्तविक आंकड़े स्पष्ट रूप से सार्वजनिक नहीं कर रहा है। मनोज रावत ने विशेष रूप से फॉर्म-7 के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाया। उनके मुताबिक, मतदाता सूची से किसी नाम को हटाने की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-7 को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में फॉर्म-7 ऑटो जनरेट होने और भाजपा कार्यकर्ताओं की शिकायतों को प्राथमिकता से लिए जाने जैसी प्रक्रियाओं ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।

फॉर्म-7 के दुरुपयोग का आरोप

मनोज रावत ने दावा किया कि SIR के दौरान करीब 97 हजार फॉर्म-7 का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया। कांग्रेस नेता के मुताबिक, इनमें से बड़ी संख्या में शिकायतों की जांच के बावजूद केवल सात मतदाताओं के नाम ही हटाए गए। कांग्रेस का तर्क है कि अगर बड़ी संख्या में आपत्तियां या फॉर्म-7 दाखिल किए गए थे, लेकिन सत्यापन के बाद अधिकांश मतदाता पात्र पाए गए, तो इससे शिकायतों की प्रकृति और उनके आधार को लेकर सवाल खड़े होते हैं। मनोज रावत ने आरोप लगाया कि फर्जी या गलत शिकायतें करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होना भी गंभीर विषय है। उनका कहना है कि अगर किसी व्यक्ति ने जानबूझकर गलत जानकारी देकर किसी पात्र मतदाता का नाम हटाने की कोशिश की है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

14 फीसदी मतदाताओं के नाम काटने का दावा

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया में उत्तराखंड के करीब 14 प्रतिशत मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। उन्होंने इसे मतदाता अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताया और निर्वाचन आयोग से पूरी प्रक्रिया का विस्तृत आंकड़ा सार्वजनिक करने की मांग की। मनोज रावत के अनुसार, कांग्रेस के 11,600 से अधिक BLA-2 और 70 BLA-1 ने SIR प्रक्रिया के दौरान जमीनी स्तर पर काम किया। उनका दावा है कि इन कार्यकर्ताओं से मिले आंकड़ों और दस्तावेजों के आधार पर कांग्रेस ने मतदाता सूची में हुई कथित कटौती को लेकर सवाल उठाए हैं।

10 साल पुराने आंकड़ों से की तुलना

मनोज रावत ने उत्तराखंड में मतदाताओं की संख्या को लेकर भी सवाल उठाया। उनके मुताबिक, अंतिम सूची में करीब 72.50 लाख मतदाता होने का अनुमान है और यह संख्या करीब 10 साल पहले राज्य में मौजूद मतदाताओं की संख्या के आसपास ही दिखाई देती है। कांग्रेस नेता का कहना है कि अगर पिछले एक दशक में उत्तराखंड की आबादी और नए मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया को देखा जाए तो मतदाताओं की संख्या में अपेक्षित वृद्धि दिखाई देनी चाहिए थी। उन्होंने सवाल उठाया कि या तो पिछले वर्षों में मतदाता संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई या फिर मौजूदा SIR प्रक्रिया में बड़ी संख्या में नाम हटाए गए। उन्होंने जनवरी 2025 के बाद मतदाता संख्या में आए कथित बदलाव को भी असामान्य बताया और निर्वाचन आयोग से इसका पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।

भाजपा और निर्वाचन आयोग पर मिलीभगत का आरोप

मनोज रावत ने आरोप लगाया कि पात्र मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया में भाजपा कार्यकर्ताओं और निर्वाचन आयोग के बीच मिलीभगत रही। हालांकि, यह कांग्रेस नेता का आरोप है और इसे प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। निर्वाचन आयोग और भाजपा का आधिकारिक पक्ष इस आरोप पर अलग हो सकता है। कांग्रेस का कहना है कि यदि मतदाता सूची में नाम हटाने के लिए गलत शिकायतें की गईं, तो शिकायतकर्ताओं की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। पार्टी का दावा है कि इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि SIR के दौरान फॉर्म-7 का इस्तेमाल वास्तविक शिकायतों के लिए हुआ या किसी राजनीतिक उद्देश्य से।

कांग्रेस अब कोर्ट जाने की तैयारी में

SIR को लेकर कांग्रेस ने अब कानूनी रास्ता अपनाने की बात कही है। मनोज रावत के मुताबिक, पार्टी पूरे मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और आंकड़ों को एकत्र कर रही है और जरूरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा। कांग्रेस की मांग है कि निर्वाचन आयोग SIR से पहले और SIR के बाद की मतदाता सूची का विस्तृत तुलनात्मक आंकड़ा सार्वजनिक करे। साथ ही यह भी बताया जाए कि कितने नाम मृत्यु, स्थान परिवर्तन, डुप्लीकेट प्रविष्टि, अनुपलब्धता या अन्य कारणों से हटाए गए। फिलहाल SIR की प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद उत्तराखंड में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस जहां मतदाता सूची में हुई कथित कटौती को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं इस पूरे मामले में अंतिम तस्वीर निर्वाचन आयोग द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले आधिकारिक आंकड़ों और सत्यापन प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।

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