उत्तराखंडहरिद्वार

हरिद्वार जेल में बंदी बने राम, लक्ष्मण और रावण, रामलीला से मिल रहा सकारात्मकता का संदेश

हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार में विजयदशमी से पहले जगह-जगह रामलीला का मंचन किया जा रहा है। इसी कड़ी में रोशनाबाद स्थित हरिद्वार जिला कारागार में भी रामलीला का आयोजन हो रहा है। इस रामलीला की खास बात यह है कि इसमें पेशेवर कलाकार नहीं, बल्कि जेल में बंद बंदी अलग-अलग पात्रों की भूमिका निभा रहे हैं। कोई भगवान राम, कोई लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न तो कोई सीता और रावण का किरदार निभा रहा है। यह आयोजन बंदियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देने के साथ सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने की पहल भी है।

जेल की चारदीवारी के भीतर रामलीला का मंचन

हरिद्वार जिला कारागार में इन दिनों रामलीला को लेकर बंदियों में उत्साह देखने को मिल रहा है। मंचन से पहले पात्रों के संवाद, भक्ति गीत और अभिनय की नियमित रिहर्सल की जाती है। कई घंटे की तैयारी के बाद शाम को मंच सजाया जाता है और रामायण के प्रसंगों का मंचन किया जाता है। राम जन्म, सीता स्वयंवर, राम बारात, राम वनवास, सीता हरण और लंका दहन जैसे प्रसंगों को प्रस्तुत करने के लिए बंदी पूरे उत्साह के साथ अभ्यास कर रहे हैं। अपने किरदारों को निभाते हुए उन्हें अभिनय करने और अपनी छिपी प्रतिभा को सामने लाने का अवसर मिल रहा है।

अलग-अलग धर्मों के बंदियों की भागीदारी

इस रामलीला की एक खास बात विभिन्न धर्मों के बंदियों की भागीदारी भी है। आयोजन में बंदी मिलकर अलग-अलग भूमिकाएं निभा रहे हैं। इससे आपसी मेलजोल और भाईचारे का संदेश सामने आ रहा है। रामलीला में हिस्सा लेने वाले बंदियों के मुताबिक, मंचन की तैयारियों और अभिनय में शामिल होने से उनका ध्यान सकारात्मक गतिविधियों पर केंद्रित रहता है। उन्हें कुछ नया सीखने और अपनी रचनात्मक क्षमता दिखाने का अवसर मिलता है। उनके लिए यह अनुभव जेल की नियमित दिनचर्या से अलग है।

तनाव कम करने और सकारात्मक सोच विकसित करने की पहल

जेल में रहने के दौरान बंदियों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियां उन्हें व्यस्त रखने तथा अपनी रुचियों को विकसित करने में मदद कर सकती हैं। रामलीला के माध्यम से बंदियों को सहयोग, अनुशासन और सामूहिक भागीदारी का अनुभव मिल रहा है। आयोजन में भाग लेने वाले बंदियों का कहना है कि वे अपने पात्रों को पूरे उत्साह के साथ निभाते हैं। रामलीला की तैयारियों में शामिल होने से उन्हें अपनी प्रतिभा को निखारने और सकारात्मक माहौल में समय बिताने का अवसर मिलता है।

जेल प्रशासन उपलब्ध करा रहा जरूरी संसाधन

जिला कारागार प्रशासन की ओर से रामलीला के मंचन के लिए जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। बंदियों को मंच, मेकअप, लाइट और साउंड जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि वे अपने किरदारों को बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर सकें। वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज कुमार आर्य के अनुसार, जिला कारागार में रामलीला और अन्य धार्मिक एवं रचनात्मक कार्यक्रमों का उद्देश्य बंदियों को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि बंदी पूरे उत्साह के साथ रामलीला में भाग लेते हैं और जेल में अन्य धार्मिक त्योहार भी मनाए जाते हैं। ऐसे आयोजन बंदियों को अपनी प्रतिभा सामने लाने का अवसर देते हैं और उनके मानसिक माहौल पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

अन्य त्योहार भी मनाए जाते हैं धूमधाम से

हरिद्वार जिला कारागार में रामलीला के अलावा गणेश चतुर्थी, जन्माष्टमी, होली और दीपावली जैसे त्योहार भी मनाए जाते हैं। इन आयोजनों के जरिए बंदियों को सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने का अवसर मिलता है। जेल में आयोजित रामलीला यह संदेश देती है कि रचनात्मक प्रतिभा किसी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती। बंदियों की भागीदारी, विभिन्न धर्मों के लोगों का साथ मिलकर मंचन करना और जेल प्रशासन का सहयोग इस आयोजन को खास बनाते हैं। धार्मिक प्रसंगों के जरिए मर्यादा, अच्छाई और सकारात्मक बदलाव का संदेश भी सामने आ रहा है।

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