
देहरादून: उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क और फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान के आसपास प्रस्तावित ईको-सेंसिटिव जोन (ESZ) को लेकर राज्य सरकार ने प्रक्रिया तेज कर दी है। दोनों राष्ट्रीय उद्यानों के लिए अलग-अलग प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। इनमें पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय लोगों की जरूरतों, पर्यटन गतिविधियों और क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाएगा। प्रस्ताव तैयार करते समय ईको-सेंसिटिव जोन का क्षेत्रफल, उसकी सीमाएं, प्रतिबंधित एवं अनुमत गतिविधियां और जोनल मास्टर प्लान जैसे विषयों पर विचार किया जाएगा। वन विभाग के स्तर पर संबंधित अधिकारियों को मामले का विस्तृत परीक्षण करने और आवश्यक कार्रवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
राजाजी नेशनल पार्क के मामले में कानूनी प्रक्रिया अहम
राजाजी नेशनल पार्क के ईको-सेंसिटिव जोन का मामला न्यायिक निर्देशों से भी जुड़ा हुआ है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप राज्य की वर्तमान स्थिति पर जवाब तैयार कर भेजने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए विधिक परामर्श लिया जाएगा और निर्धारित समयसीमा के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही ईको-सेंसिटिव जोन से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं और उनके समाधान के लिए कैबिनेट से मार्गदर्शन लेने की तैयारी भी की जा रही है। प्रस्ताव में यह तय करना महत्वपूर्ण होगा कि पार्क के आसपास किन गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जाए, किन्हें नियमन के साथ अनुमति मिले और कौन-सी गतिविधियां सामान्य रूप से जारी रह सकें।
प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विषयों पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका को लेकर भी विचार किया जाएगा।
फूलों की घाटी में पर्यटन और पर्यावरण के बीच संतुलन की चुनौती
फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान के लिए ईको-सेंसिटिव जोन का प्रस्ताव तैयार करते समय पर्यटन गतिविधियों और प्राकृतिक पर्यावरण के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह क्षेत्र अपनी विशिष्ट जैव विविधता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। ऐसे में पर्यटकों की आवाजाही से पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का आकलन महत्वपूर्ण होगा। प्रस्ताव तैयार करने के लिए संबंधित जिलाधिकारी, पर्यटन विभाग और अन्य विभागों से जरूरी जानकारी जुटाई जाएगी। इसके आधार पर क्षेत्र की वहन क्षमता का आकलन करने और पर्यटन गतिविधियों को व्यवस्थित करने से जुड़े पहलुओं पर विचार किया जाएगा। वहन क्षमता का आकलन यह समझने में मदद करता है कि किसी संवेदनशील प्राकृतिक क्षेत्र में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना पर्यटन गतिविधियों का कितना दबाव स्वीकार किया जा सकता है। हालांकि, पर्यटकों की संख्या पर किसी निश्चित सीमा को लेकर अंतिम निर्णय प्रस्ताव और आगे की प्रक्रिया के आधार पर ही स्पष्ट होगा।
प्रतिबंधित, विनियमित और अनुमत गतिविधियां होंगी तय
ईको-सेंसिटिव जोन के प्रस्ताव में गतिविधियों को अलग-अलग श्रेणियों में निर्धारित करना एक महत्वपूर्ण चरण होगा। इसके तहत पर्यावरण के लिए नुकसानदेह मानी जाने वाली गतिविधियों पर प्रतिबंध, कुछ गतिविधियों पर शर्तों के साथ नियंत्रण और निर्धारित गतिविधियों को अनुमति देने जैसे प्रावधानों पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा जोनल मास्टर प्लान तैयार करने और निगरानी समिति की व्यवस्था से जुड़े पहलुओं को भी प्रस्ताव में शामिल किया जाएगा। संबंधित जिलों से रिपोर्ट मिलने के बाद उपलब्ध जानकारी का परीक्षण किया जाएगा, ताकि प्रस्ताव स्थानीय परिस्थितियों और पर्यावरणीय जरूरतों के अनुरूप तैयार हो सके।
स्थानीय आबादी की जरूरतों को भी मिलेगी जगह
दोनों राष्ट्रीय उद्यानों के आसपास रहने वाले लोगों की जरूरतों और जनभावनाओं को ध्यान में रखना भी इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। ईको-सेंसिटिव जोन का उद्देश्य संरक्षित क्षेत्रों के आसपास पर्यावरणीय दबाव को नियंत्रित करना है। ऐसे में प्रस्ताव तैयार करते समय संरक्षण की जरूरतों और स्थानीय जीवन से जुड़ी गतिविधियों के बीच संतुलन बनाने पर जोर रहेगा। राजाजी नेशनल पार्क और फूलों की घाटी की भौगोलिक स्थिति और पर्यावरणीय संवेदनशीलता अलग-अलग है। इसी वजह से दोनों के लिए एक जैसी व्यवस्था लागू करने के बजाय अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे।
प्रमुख सचिव वन ने दिए परीक्षण के निर्देश
प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु ने संबंधित अधिकारियों को दोनों मामलों का गहन परीक्षण करने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। राजाजी नेशनल पार्क के मामले में न्यायिक निर्देशों के अनुरूप समयसीमा के भीतर जवाब तैयार करना और फूलों की घाटी में पर्यटन की वहन क्षमता समेत पर्यावरणीय पहलुओं का आकलन करना आगे की प्रक्रिया के प्रमुख हिस्से होंगे। अब संबंधित विभागों की रिपोर्ट, कानूनी परामर्श और पर्यावरणीय आकलन के आधार पर प्रस्तावों को आगे बढ़ाया जाएगा। इन प्रस्तावों के अंतिम स्वरूप से यह स्पष्ट होगा कि दोनों राष्ट्रीय उद्यानों के आसपास विकास, पर्यटन और स्थानीय गतिविधियों को किन नियमों के तहत संचालित किया जा सकेगा।




