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चमोली के नारायणबगड़ स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं की मांग, 5 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू

चमोली: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। दुर्गम इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को इलाज, जांच और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता के लिए अक्सर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई जगह पर्याप्त चिकित्सक, मेडिकल उपकरण और जांच सुविधाएं नहीं होने से मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है। इसी बीच चमोली जिले के नारायणबगड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की मांग को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। धरनारत जनप्रतिनिधियों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र की 35 हजार से अधिक आबादी के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन यहां पर्याप्त जगह, जरूरी जांच सुविधाओं और संसाधनों की कमी के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। आंदोलन को स्थानीय ग्रामीणों और विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है।

नारायणबगड़ स्वास्थ्य केंद्र के बाहर धरने पर बैठे जनप्रतिनिधि

स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग को लेकर क्षेत्र पंचायत सदस्य डागतोली नीरज नेगी, क्षेत्र पंचायत सदस्य बिपिन परिहार और ग्राम प्रधान बेडुला उर्मिला कंडारी धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि स्थानीय लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल में जरूरी जांच उपकरण, विशेषज्ञ डॉक्टर और पर्याप्त स्टाफ होना चाहिए। आंदोलनकारियों के मुताबिक, मौजूदा सुविधाओं की कमी के चलते मरीजों को कई जरूरी जांचों और उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। इससे खासकर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं।

अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं होने से गर्भवती महिलाओं को परेशानी

ग्राम प्रधान बेडुला उर्मिला कंडारी ने स्वास्थ्य केंद्र में अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए दूसरे अस्पतालों में जाना पड़ता है। उन्होंने सरकार से स्वास्थ्य केंद्र में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग करते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर जांच और उपचार की व्यवस्था होने से ग्रामीणों को समय और धन की बचत के साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

आंदोलनकारियों की पांच प्रमुख मांगें

नारायणबगड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए आंदोलनकारियों ने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं।

  1. अल्ट्रासाउंड सुविधा शुरू हो: गर्भवती महिलाओं सहित अन्य मरीजों को आवश्यक जांच के लिए दूसरे शहरों का रुख न करना पड़े।
  2. एक्स-रे मशीन उपलब्ध कराई जाए: मरीजों की जरूरी जांच स्थानीय स्तर पर हो सके।
  3. महिला रोग विशेषज्ञ की तैनाती हो: महिलाओं को स्त्री रोग संबंधी परामर्श और उपचार के लिए दूर न जाना पड़े।
  4. पर्याप्त डॉक्टर और स्टाफ नियुक्त हों: स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारु संचालन के लिए जरूरी मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, अतिरिक्त भवन का निर्माण भी किया जाए।
  5. स्वास्थ्य केंद्र का उच्चीकरण किया जाए: क्षेत्र की आबादी और जरूरतों के अनुरूप चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया जाए।

आंदोलनकारियों का कहना है कि इन मांगों पर ठोस कार्रवाई होने से नारायणबगड़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज मिल सकेगा।

मांगें पूरी होने तक धरना जारी रखने का ऐलान

धरने पर बैठे जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। ग्राम प्रधान बेडुला उर्मिला कंडारी समेत स्थानीय ग्रामीणों और स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की मांग का समर्थन किया है। फिलहाल, आंदोलनकारियों की मांगों पर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कार्रवाई की स्थिति के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी बनी बड़ी चुनौती

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता लंबे समय से एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दा रही है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, अस्पतालों तक पहुंचने में लगने वाले समय और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता जैसी चुनौतियों का असर ग्रामीण मरीजों पर पड़ता है। स्थानीय स्तर पर पर्याप्त उपचार नहीं मिलने पर मरीजों को देहरादून, ऋषिकेश, हल्द्वानी या अन्य बड़े शहरों के अस्पतालों में जाना पड़ सकता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यात्रा, वाहन और इलाज का खर्च उठाना मुश्किल हो जाता है। आपात स्थिति में लंबी दूरी तय करना मरीज की परेशानी और बढ़ा सकता है। ऐसे में चुनौती केवल अस्पताल भवन बनाने तक सीमित नहीं है। नियमित डॉक्टरों की तैनाती, जरूरी जांच उपकरणों की उपलब्धता और उनका संचालन, पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मी तथा आपातकालीन उपचार की व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। नारायणबगड़ में शुरू हुआ धरना इसी सवाल को सामने लाता है कि क्या पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीणों को जरूरी जांच और उपचार के लिए अपने घरों से दूर जाना पड़ना चाहिए? स्थानीय लोगों की मांग है कि स्वास्थ्य केंद्र में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार कर उन्हें अपने क्षेत्र में ही बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन मांगों पर क्या कदम उठाते हैं।

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