
विकासनगर: देहरादून जिले के कालसी क्षेत्र के कचटा गांव में पत्नी की हत्या के मामले के बाद खतपट्टी कोरू के ग्रामीणों ने सख्त सामाजिक फैसला लिया है। खुली बैठक में आरोपी मनोज के सामाजिक बहिष्कार का निर्णय लिया गया। बैठक में यह भी तय किया गया कि यदि खत क्षेत्र का कोई व्यक्ति या आरोपी का रिश्तेदार उसकी कानूनी पैरवी, गवाही या जमानत में सहयोग करता है, तो उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और उसे खत से बहिष्कृत किया जाएगा। ग्रामीणों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कानून से आरोपी को कठोर सजा देने की अपील की है। हालांकि, मामले में अंतिम सजा का फैसला न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।
क्या है कचटा गांव का पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, 8 अक्टूबर को कालसी ब्लॉक के कचटा गांव में 22 वर्षीय नीलू उर्फ नीलम की उसके पति मनोज पर धारदार हथियार दरांती से गर्दन पर वार कर हत्या करने का आरोप लगा। बताया गया कि घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था। अगले दिन ग्रामीणों ने उसे गांव के पास स्थित एक छानी से पकड़कर राजस्व पुलिस के हवाले कर दिया। राजस्व पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। मेडिकल जांच के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। बताया गया है कि मनोज और नीलम की शादी करीब तीन साल पहले हुई थी। घटना की वजह आपसी विवाद बताई जा रही है। हालांकि, मामले में हत्या के आरोप और उससे जुड़े तथ्यों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

खत कोरू की खुली बैठक में लिया गया फैसला
इस घटना के बाद खतपट्टी कोरू के ग्रामीणों ने सोमवार को खुली बैठक की। बैठक की अध्यक्षता खत कोरू के सदर स्याणा सुनील दत्त जोशी ने की। इसमें क्षेत्र के 17 गांवों के लोगों ने भाग लिया और घटना पर नाराजगी जताई। बैठक में आरोपी के परिवार की ओर से उसकी पैरवी, गवाही या जमानत में सहयोग नहीं करने का निर्णय लिया गया। ग्रामीणों ने यह भी अपील की कि यदि आरोप अदालत में साबित होते हैं, तो आरोपी को कानून के अनुसार कठोरतम सजा दी जाए।
आरोपी की मदद करने पर पांच लाख रुपये के जुर्माने का निर्णय
खत कोरू की बैठक में लिए गए फैसले के अनुसार, यदि खत क्षेत्र का कोई व्यक्ति, आरोपी के परिवार में ब्याही हुई बेटियां या अन्य रिश्तेदार कानूनी मामले में उसकी मदद करते हैं, तो उन पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाने और सामाजिक बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया है। बैठक में यह भी कहा गया कि यदि भविष्य में आरोपी कानूनी प्रक्रिया के बाद रिहा हो जाता है, तब भी उसे परिवार, गांव और खत क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। यह फैसला ग्रामीणों की सामूहिक बैठक में लिया गया सामाजिक निर्णय है। इसकी कानूनी वैधता और किसी व्यक्ति के अधिकारों पर इसके प्रभाव का निर्धारण संबंधित कानूनों के अनुसार ही होगा।
सुनील जोशी बोले- समाज में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं
खत कोरू के सदर स्याणा सुनील जोशी ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोग शांतिप्रिय हैं और समाज में इस तरह की हिंसक घटनाओं के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उद्देश्य से आरोपी के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार का फैसला लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी की मदद करने वालों के खिलाफ भी खत की बैठक में तय निर्णय के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में 17 गांवों के ग्रामीण हुए शामिल
खतपट्टी कोरू की बैठक में सदर स्याणा सुनील जोशी के अलावा वीरेन्द्र सिंह, माया सिंह, हाकम सिंह, केदार सिंह, बलिया और विक्रम सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे। बैठक में शामिल लोगों ने महिला की हत्या की घटना पर दुख जताते हुए क्षेत्र में ऐसी घटनाओं को रोकने की जरूरत पर जोर दिया।
क्या है खतपट्टी की परंपरा?
उत्तराखंड के देहरादून जिले का जौनसार-बावर क्षेत्र अपनी विशिष्ट संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था के लिए जाना जाता है। यहां खतपट्टी गांवों के समूह को कहा जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, खतपट्टी कोरू में 17 गांव शामिल हैं और कचटा भी इसी क्षेत्र का हिस्सा है। परंपरागत व्यवस्था में खत के सदर स्याणा के नेतृत्व में गांवों तक बैठक की सूचना पहुंचाई जाती है। सामाजिक या सामुदायिक मुद्दों पर ग्रामीण एकत्र होकर चर्चा करते हैं और सहमति के आधार पर निर्णय लेते हैं। कचटा गांव की घटना के बाद खतपट्टी कोरू की बैठक में लिया गया फैसला इसी पारंपरिक सामुदायिक व्यवस्था के तहत सामने आया है। अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और न्यायालय की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।




