उत्तराखंड में SIR पर कांग्रेस के गंभीर सवाल, गणेश गोदियाल बोले- अधिकारियों ने खुद आपत्तिकर्ता बनकर काटे वोटरों के नाम

उत्तराखंड में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने और दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरवाए जाने की प्रक्रिया पर उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र भेजकर SIR के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया की वैधानिकता पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि कई मामलों में चुनाव अधिकारियों ने निर्धारित प्रक्रिया से आगे बढ़कर खुद ही आपत्तिकर्ता की भूमिका निभाई और फॉर्म-7 के जरिए मतदाताओं के नाम हटाए गए। कांग्रेस ने दावा किया है कि यदि किसी मतदाता का नाम हटाने की प्रक्रिया ही नियमों के अनुरूप नहीं थी, तो ऐसे पुराने मतदाताओं से दोबारा नाम दर्ज कराने के लिए फॉर्म-6 भरवाना भी गंभीर कानूनी सवाल खड़े करता है।
4.53 लाख से ज्यादा नाम हटाए जाने का दावा
गणेश गोदियाल ने अपने पत्र में जनवरी 2026 से 29 मई 2026 के बीच चली कथित प्री-SIR प्रक्रिया का उल्लेख किया है। कांग्रेस के मुताबिक इस दौरान मतदाता सूची में एक जैसे नाम, पते, फोटो और अन्य जनसांख्यिकीय जानकारियों के मिलान के लिए डी-डुप्लीकेशन सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। कांग्रेस का दावा है कि इस प्रक्रिया के आधार पर मई 2026 से पहले 4,53,459 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि इन मामलों में कथित तौर पर फॉर्म-7 सिस्टम के जरिए स्वतः तैयार हुए और आपत्तिकर्ता के स्थान पर सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी यानी AERO या निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी यानी ERO का पदनाम दर्ज किया गया। कांग्रेस का कहना है कि यही बिंदु पूरी प्रक्रिया की वैधानिकता को लेकर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के बाद 97 हजार से ज्यादा मामलों पर सवाल
कांग्रेस के अनुसार 14 जुलाई 2026 को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 71.33 लाख मतदाता दर्ज थे। इनमें से लगभग 24.30 लाख लोगों को विभिन्न तार्किक असंगतियों की श्रेणी में रखा गया। पार्टी का कहना है कि इन मतदाताओं के रिकॉर्ड और पुराने दस्तावेजों का मिलान किया गया और कई लोगों को अपने दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किए गए।गणेश गोदियाल ने अपने पत्र में दावा किया है कि दस्तावेज निर्धारित समय पर उपलब्ध नहीं करा पाने वाले 97,186 मतदाताओं के मामलों में भी सिस्टम के जरिए फॉर्म-7 तैयार हुए। कांग्रेस का आरोप है कि इसके बाद अधिकारियों ने खुद को आपत्तिकर्ता की भूमिका में रखते हुए इन मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी की।
कांग्रेस ने नियम 13(2) का दिया हवाला
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने अपनी आपत्ति के समर्थन में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के नियम 13(2) का हवाला दिया है। कांग्रेस के मुताबिक मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के माध्यम से आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार निर्धारित व्यक्ति को ही है। ऐसे में चुनाव अधिकारियों द्वारा खुद आपत्तिकर्ता की भूमिका निभाने को लेकर कांग्रेस ने निर्वाचन विभाग से कानूनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। गोदियाल का तर्क है कि अधिकारियों के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं होना चाहिए जिसके तहत वे खुद आपत्तिकर्ता बनकर किसी मतदाता का नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू करें।
‘सॉफ्टवेयर कानून से ऊपर नहीं हो सकता’
गणेश गोदियाल ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाला कोई भी सॉफ्टवेयर संसद द्वारा बनाए गए कानून या निर्धारित नियमों से ऊपर नहीं हो सकता। उनका कहना है कि यदि कानून यह तय करता है कि मतदाता सूची में दर्ज नाम के खिलाफ आपत्ति कौन दाखिल कर सकता है, तो केवल सॉफ्टवेयर के आधार पर आपत्तिकर्ता की नई श्रेणी तैयार नहीं की जा सकती। कांग्रेस ने इसी आधार पर निर्वाचन विभाग से पूरी प्रक्रिया का कानूनी आधार सार्वजनिक करने की मांग की है।
फॉर्म-6 को लेकर भी कांग्रेस ने उठाया बड़ा सवाल
SIR विवाद में कांग्रेस ने फॉर्म-6 को लेकर भी गंभीर आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि जिन लोगों के नाम पहले से मतदाता सूची में दर्ज थे और जो वर्षों से मतदान करते आए हैं, यदि प्रक्रिया के दौरान उनका नाम हट गया है तो उन्हें दोबारा नाम दर्ज कराने के लिए पहली बार मतदाता बनने वाले फॉर्म-6 की प्रक्रिया में नहीं डालना चाहिए। गणेश गोदियाल के मुताबिक फॉर्म-6 में आवेदक से संबंधित घोषणा की जाती है कि वह पहली बार मतदाता के रूप में आवेदन कर रहा है और उसका नाम किसी अन्य संसदीय या विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज नहीं है। कांग्रेस का तर्क है कि पुराने मतदाताओं से ऐसी घोषणा करवाना उचित नहीं होगा, क्योंकि उनके पुराने मतदाता रिकॉर्ड निर्वाचन विभाग के पास पहले से मौजूद हैं।
पुराने रिकॉर्ड से हो सकता है सत्यापन- कांग्रेस
कांग्रेस ने कहा है कि जिन लोगों का नाम पहले से मतदाता सूची में रहा है, उनकी पहचान और मतदाता स्थिति के सत्यापन के लिए चुनाव विभाग के पुराने रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है। पार्टी का आरोप है कि यदि पुराने मतदाताओं को नए आवेदक की तरह फॉर्म-6 भरने के लिए मजबूर किया गया, तो इससे अनावश्यक कानूनी और प्रशासनिक जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। कांग्रेस ने इस पूरी प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन विभाग से स्पष्ट जवाब और वैधानिक स्थिति सामने रखने की मांग की है।
कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग के सामने रखीं पांच मांगें
गणेश गोदियाल की ओर से भेजे गए पत्र में कांग्रेस ने SIR की प्रक्रिया को लेकर कई मांगें रखी हैं।
पहली मांग, अधिकारियों द्वारा फॉर्म-7 के माध्यम से नाम हटाने की पूरी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय और कानूनी जांच कराई जाए।
दूसरी मांग, निर्वाचन आयोग यह स्पष्ट करे कि किस कानून या नियम के तहत AERO और ERO को खुद आपत्तिकर्ता बनकर फॉर्म-7 तैयार करने का अधिकार दिया गया।
तीसरी मांग, दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के आधार पर जिन 97,186 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उनके मामलों की तत्काल समीक्षा की जाए और पात्र मतदाताओं के नाम बहाल किए जाएं।
चौथी मांग, पहले से मतदाता रहे लोगों के लिए नाम बहाली की अलग और सरल प्रक्रिया तैयार की जाए तथा उन्हें पहली बार मतदाता बनने वाला फॉर्म-6 भरने के लिए बाध्य न किया जाए।
पांचवीं मांग, चुनावी प्रक्रिया में किसी प्रशासनिक सॉफ्टवेयर या गाइडबुक के बजाय कानून और निर्धारित नियमों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
SIR पर आगे बढ़ सकता है सियासी विवाद
उत्तराखंड में SIR पहले ही राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र भेजे जाने के बाद विवाद का कानूनी और प्रशासनिक पहलू भी सामने आ गया है। कांग्रेस ने जहां पूरी प्रक्रिया की वैधानिकता पर सवाल उठाए हैं, वहीं अब नजर निर्वाचन विभाग के जवाब और इस मामले में उठाए जाने वाले अगले कदम पर है। आने वाले दिनों में SIR से जुड़े मतदाता सूची के आंकड़े, नाम हटाने की प्रक्रिया और फॉर्म-6 को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।




